बुधवार, 28 अक्तूबर 2015

परम्पराओं का पालन या अँध बिश्बास का खेल (करबा चौथ )

परम्पराओं का पालन या अँध बिश्बास का खेल
(करबा चौथ )





करवाचौथ के दिन
भारतबर्ष में सुहागिनें
अपने पति की लम्बी उम्र के लिए
चाँद दिखने तक निर्जला उपबास रखती है .
पति पत्नी का रिश्ता समस्त
इस धरती पर सबसे जरुरी और पवित्र रिश्ता है
आज के इस दौर में जब सब लोग
एक दुसरे की जान लेने पर तुलें हुयें हों
तो आजकल पत्नी का पति के लिए उपवास रखना
किसी अजूबे से कम नहीं हैं।
कहाबत है कि करवा चौथ का व्रत रखने से
पति की आयु बढती है और प्यार भी
तो क्या जिनके खानदान में ये परंपरा है
क्या वहां कोई विधवा नहीं होती
और वहां कभी कोई तलाक नहीं हुआ
अगर ऐसा नहीं है तो फिर क्यूं ये दिखावा
ऐसें भी दम्पति हैं सारे साल लड़ते झगड़ते है
और फिर ये दिखावा करते है
क्या जो महिलाये ये व्रत नहीं रखती
वो अपने पति से प्यार नहीं करती
क्या उनके मन में
अपने पति की उम्र की लम्बी कामना नहीं होती
क्या वे विधवा हो जाती है
नहीं ऐसा कुछ नहीं होता
हम सब ये सब जानते हैं
फिर भी ये परंपरा निभाते चले जाते है
ये अंधविश्वास नहीं तो और क्या है
आज जरुरत है पुराने अंधविश्वास को छोड़कर
नयी मान्यताओ को लेकर आगे बढना
जिसका कोई ठोस मकसद हो
वेसे भी क्या एक दिन ही काफी है
पति के लम्बी उम्र की कामना के लिए
बाकी के दिन नहीं
अगर हर रोज ये कामना करनी हैं
फिर ये करवा चौथ क्यों ?
आज के समय में
जरुरत है कि
नयी परम्पराओं को जन्म देकर
आपसी रिश्ता
कैसे मजबूत कर सकें
परस्पर मिलकर खोज करने की।

मेरी पत्नी को समर्पित एक कबिता :

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अर्पण आज तुमको हैं जीवन भर की सब खुशियाँ
पल भर भी न तुम हमसे जीवन में जुदा होना
रहना तुम सदा मेरे दिल में दिल में ही खुदा बनकर
ना हमसे दूर जाना तुम और ना हमसे खफा होना

अपनी तो तमन्ना है सदा हर पल ही मुस्काओ
सदा तुम पास हो मेरे ,ना हमसे दूर हो पाओ
तुम्हारे साथ जीना है तुम्हारें साथ मरना है
तुम्हारा साथ काफी हैं बाकी फिर क्या करना है

अनोखा प्यार का बंधन इसे तुम तोड़ ना देना
पराया जान हमको अकेला छोड़ ना देना
रहकर दूर तुमसे हम जियें तो बह सजा होगी
ना पायें गर तुम्हें दिल में तो ये मेरी खता होगी

मदन मोहन सक्सेना

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (30.10.2015) को "आलस्य और सफलता "(चर्चा अंक-2145) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

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  2. paraspar tayaag bharatiy parvaaro ki parmparaye hai vayaapk sandarbh mai dekhe tab hame bahut kuch seekhne ko milta hai

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  3. आपसी प्यार है विश्वास है ..परम्परा निर्वहन भी है काफी हद तक .....

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  4. भारत त्यौहारों का देश है। त्यौहारों के माध्यम से ही स्त्रियों और पुरुषों को भी सजने संवरने का अवस्र मिलता है। घरमें पूजा का मंगल वातावरण होता है। पकवान बनते हैं । पहले तो इसीसे इतने त्यौहार मनाये जाते थे क्यूं कि और दिन तो सादा भोजन दिन भर मेहनत यही चलता था और औरतें तो बिचारी सामाजिक जीवन से वंचित रह जाती । तो हमारे पुरखों ने सब के लियो सोचा। ये बात और हे कि आज कल तो लोग रोज ही नये कपडे पहनने लगे हैं और पकवान खाने लगे हैं पर वे भी विशेष वर्ग के । सत्तर प्रतिशत लोग तो दाल रोटी ही जुटा पाते हैं मुश्किल से। पति के लिये हरतालिका व्रत महाराष्ट्र में भी रखा जाता है।गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले, और अन्यान्य प्रदेशों में भी इस तरह का कोई न कोई त्यौहार अवश्य होगा। य़े तो हमारी उत्सव प्रीयता है।

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